राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: एसआईटी आज सौंप सकती है अंतिम रिपोर्ट, कई नए खुलासों की संभावना
Ram Mandir donation theft case
लखनऊ। Ram Mandir donation theft case, अयोध्या के श्रीराम जन्म भूमि मंदिर में हुई चढ़ावा चोरी की अंतिम जांच रिपोर्ट बुधवार को शासन को सौंपी जा सकती है। एसआईटी ने अंतिम जांच रिपोर्ट लगभग तैयार कर ली है।
सूत्रों के अनुसार, एसआईटी ने अंतिम जांच रिपोर्ट में चढ़ावा चोरी को लेकर कुछ और लोगों की भूमिका पर सवालिया निशान लगाए हैं।
लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत के नेतृत्व में गठित तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआइटी) को सरकार ने अंतिम जांच रिपोर्ट सौंपने के लिए 15 जुलाई तक का समय दिया है।
13 जून को हुआ था SIT का गठन
राज्य सरकार ने चढ़ावा चोरी मामले की जांच के लिए 13 जून को एसआईटी का गठन किया था। एसआईटी ने 15 जून से मामले की जांच शुरू की थी। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में 40 दिनों में 70 बार चढ़ावा चोरी किए जाने के अलावा चढ़ावे की गणना में गड़बड़ी और बैंक कर्मियों की मिलीभगत का राजफाश एसआईटी ने किया है।
खास तौर पर चढ़ावे की गणना के लिए तैनात कर्मियों की मिलीभगत, बिना जांच के गणना स्थल तक कर्मियों के आने-जाने की छूट देने के अलावा कई तथ्यों को एसआइटी ने जांच में शामिल किया है।
पूरे प्रकरण में एसआईटी ने प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में डॉ. अनिल मिश्रा व गणना प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव की भूमिका पर सवालिया निशान लगाया था।
डॉ. अनिल मिश्रा की भूमिका पर सवाल
एसआईटी सिर्फ चढ़ावा चोरी और उससे संबंधित व्यवस्थाओं में कमियों की जांच कर रही है। सूत्रों के अनुसार अंतिम जांच रिपोर्ट में एसआईटी ने जांच का फोकस चढ़ावे का स्थानांतरण, गणना और उसी दौरान हुई चोरी पर ही रखा है।
नतीजतन रिपोर्ट में डॉ. अनिल मिश्रा व सुभाष श्रीवास्तव के नाम जोड़ा जा सकता है। मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार नकदी के संकलन, प्रबंधन व पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी डॉ. अनिल मिश्रा की थी। एसआइटी के अनुसार यह काम सही तरीके से हुआ होता तो चढ़ावा चोरी की गुंजाइश नहीं रहती।
प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार बतौर गणना प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव ने गणना स्थल पर तैनात कर्मियों की तलाशी की व्यवस्था लागू करने में लापरवाही बरती थी, इसलिए उम्मीद है कि उनका भी नाम अंतिम रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा।

हुंडीवार गणना की व्यवस्था का सुझाव
अभी तक चढ़ावे की गणना हुंडीवार नहीं की जा रही थी। हुंडियों में रखी दान की सामग्री को मिलाकर की जाने वाली गणना की व्यवस्था में एसआइटी बदलाव का सुझाव दे सकती है।
प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई थी कि गणना कर्मियों द्वारा सभी हुंडियो को पलट कर दान को मिला दिया जाता था। इसके बाद गणना का जाती थी, जबकि गणना का कार्य हुंडीवार किया जाना चाहिए था।
प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में था इनका नाम
एसआईटी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में बार-बार चढ़ावे की रकम हटाने व छिपाने के लिए अविनाश शुक्ला और मनीष यादव का नाम शामिल किया गया था।
वहीं, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा व करुणेश पांडेय का नाम चढ़ावा चोरी में अविनाश व मनीष की मदद करने को लेकर शामिल किया गया था। साथ ही रमाशंकर मिश्रा का नाम नोटों की गड्डियां छिपाने के लिए शामिल किया गया था।
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दिए जा सकते हैं यह सुझाव
- गणना स्थल पर कर्मियों के प्रवेश व बाहर जाने पर तलाशी लेने की व्यवस्था।
- गणना कर्मियों को पहनना होगा जेब रहित वस्त्र।
- निजी वस्तुओं को साथ नहीं ले जा सकेंगे गणना कर्मी।
- मूल्यवर्ग वार अभिलेख, वाउचर व प्रमाण पत्र तैयार किए जाएंगे।
- बायोमिट्रिक उपस्थित की व्यवस्था लागू की जाएगी।
- गणना कक्ष में खाद्य एवं पेय पदार्थ ले जाने पर होगा प्रतिबंध।
- एआइ आधारित सीसीटीवी से निगरानी की व्यवस्था